Padh of the Day

Sheetkaal – 13 – Hilgan Kathin He Yaman Ki

हिलगन कठिन है या मन की || .. २
जाके लिए सुनो मेरी सजनी
लाज गयी सब तन की || १ ||

लोकहँसो परलोक हिजाओ
ओर दो कुलगारी ||
सोक्योरहे ताहि विनदेखें
जोजाको हितकारी || २ ||

रसुलब्धनिमिषनहीं छांडत
ज्यों आधीन मृगगानें ||
कुंभनदास स्नेह मरम की
श्रीगोवर्धनधर जानें || ३ ||